सिंहस्थ कुंभ प्रवचन- 9 (भाग - 1)
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- Опубликовано: 8 фев 2025
- गुणातीत बनो: साक्षी भाव से जीवन जीने की कला
यह प्रवचन गुणातीत होने के महत्व और साक्षी भाव से जीवन जीने की कला पर केंद्रित है। गुरुदेव भगवान समझाते हैं कि गुणातीत होने का अर्थ गुणों का अभाव नहीं, बल्कि उनसे ऊपर उठ जाना है। साक्षी भाव से जीवन जीने का अर्थ है, जीवन की घटनाओं को बिना किसी आसक्ति या द्वेष के देखना, जैसे नदी के किनारे बैठा व्यक्ति नदी के बहाव को सिर्फ़ देखता है।
गुणों से परे: साक्षी भाव का विकास
1. उदासीनता: जीवन में आने वाले सुख-दुःख, लाभ-हानि जैसी द्वंद्वात्मक परिस्थितियों में उदासीन रहना। जैसे नदी में बहता कूड़ा-कचरा कुछ देर दिखता है और फिर ओझल हो जाता है,
उसी तरह जीवन की अवस्थाएं भी आती जाती रहती हैं।
2. अनासक्ति: किसी भी गुण या अवस्था से आसक्त न होना। बचपन, जवानी, बुढ़ापा ये सब अवस्थाएं आती जाती रहती हैं, इनसे चिपके रहने का कोई अर्थ नहीं है।
3. स्वीकार्यता: जीवन में जो कुछ भी घटित होता है उसे भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करना। गुरुदेव भगवान कहते हैं कि
भगवान के किए में राज़ी होना ही सच्ची भक्ति है।
4. मन का नियंत्रण: अपने मन को भगवान के अनुसार ढालना। भगवान से प्रार्थना करने के बजाय, भगवान के मन के अनुरूप अपना मन बनाना।
भक्ति का सही अर्थ
गुरुदेव भगवान के अनुसार, भक्ति का अर्थ सिर्फ़ माला फेरना या मंदिर बनवाना नहीं है, बल्कि भगवान के हर निर्णय में राज़ी होना है। चाहे सुख मिले या दुःख, भगवान की इच्छा में रमण करना ही सच्ची भक्ति है। गुरुदेव भगवान कहते हैं कि "जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए" - जिस प्रकार भगवान रखेंगे, उसी प्रकार रहेंगे।
गुणातीत और अज्ञानी भक्त में अंतर
अज्ञानी भक्त:भगवान से अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करता है।
वह भगवान को अपने अनुसार बदलना चाहता है।
ज्ञानी भक्त: भगवान की इच्छा में रमण करता है। वह भगवान के हर निर्णय को स्वीकार करता है और उसमें राज़ी रहता है।
राज़ी होने का महत्व
गुरुदेव भगवान बार-बार राज़ी होने के महत्व पर ज़ोर देते हैं। वह कहते हैं कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वह भगवान की इच्छा से होता है। इसलिए हमें हर परिस्थिति में राज़ी रहना चाहिए। राज़ी होना ही दुःखों से मुक्ति का मार्ग है।
निष्कर्ष
गुरुदेव भगवान का संदेश स्पष्ट है: गुणों से ऊपर उठो, साक्षी भाव से जीवन जियो और भगवान के हर निर्णय में राज़ी रहो। यही सच्ची भक्ति है
और यही जीवन का सही मार्ग है।
ॐ परम पुज्यनीय श्रद्धेय श्री सद्गुरु देव भगवान जी के पावन श्री चरणों में सादर कोटि - कोटि नमन स्वीकार हो
Jai gurudev bhgwan ke Jai ho
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